मृत्युभोज का त्याग करे
मृत्युभोज का त्याग करे|| एक मनुष्य की जिंदगी भिन्न भिन्न समस्याओं से गुजरती हैं||ऐसे में मृत्यु भोज जैसी कुरिति जो ईस समस्याओं का मुख्य कारण हैं || मैं खुद कई परिवारों की दुर्गति का मूकदर्शक गवाह रहा हूँ।कब तक इस तरह बर्बाद होते परिवारों को चुपचाप देखता रहूँ?कुछ तो लूट की सीमा हो!कुछ तो मानवता की मर्यादाएं हो!कुछ तो पंचों में इंसानियत का अंश जिंदा मिले!किसी इंसान की मौत पर सब इस तरह खाने को टूट पड़ते है जैसे उनके जीवन का अंतिम खाना यही हो!फिर कभी मिलेगा ही नहीं!इंसान की गिरावट को देखकर गिद्ध विलुप्त हो गए हमारे क्षेत्र से!एक दूसरे की झूठन चाटने की इंसानी कला को देखकर कुत्ते भी आने बंद हो गए लेकिन इंसान है कि गिरना बंद करता ही नहीं! कोई इंसान मर जाये तो उसके बच्चे अनाथ हो जाते है,उसके परिजन गला फाड़-फाड़कर रो रहे होते है।इन कर्कश-क्रंदन रोने की चीखों के बीच बैठकर इंसान मिठाईयां खा कैसे लेता है?कुछ तो इंसान कहने के लिए संवेदनाओं के टुकड़े खुद के अंदर बचा लो!सिर मुंडाएं,आंखों में आंसुओ का सैलाब लिए झूठी थालियों को लिए घ...